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ईरान युद्ध के बाद खाड़ी देशों ने बदली सुरक्षा रणनीति

 अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच हालिया संघर्ष के बाद खाड़ी देश अपनी सुरक्षा रणनीतियों और गठबंधनों का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं। युद्धविराम के बावजूद क्षेत्र में तनाव बना हुआ है, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर, जो खाड़ी देशों के लिए एक अहम व्यापारिक मार्ग है।


इस संघर्ष ने खाड़ी देशों की कमजोरियों को उजागर किया, क्योंकि उनके यहां मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने ईरानी हमलों का निशाना बने। इससे अमेरिका पर सुरक्षा के लिए निर्भरता को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं।

हालांकि खाड़ी देशों ने इस दौरान मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकने में अपनी सफलता का दावा किया, लेकिन क्षेत्र के भीतर मतभेद भी सामने आए हैं। संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन जैसे देशों ने ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है, जबकि कुछ अन्य देश कूटनीतिक रास्ता अपनाने के पक्ष में हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अब खाड़ी देश अपनी सुरक्षा साझेदारियों को विविध बना रहे हैं और केवल अमेरिका पर निर्भर रहने के बजाय तुर्की, पाकिस्तान और यूरोपीय देशों के साथ संबंध मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।

हाल के रक्षा समझौते, जिनमें भारत और यूक्रेन के साथ साझेदारी भी शामिल है, इस बदलाव की ओर इशारा करते हैं। वहीं सऊदी अरब जैसे क्षेत्रीय शक्तियां ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिश कर रही हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि खाड़ी देश अब रक्षा ढांचे में निवेश बढ़ाएंगे, जिसमें मिसाइल डिफेंस सिस्टम और समुद्री सुरक्षा शामिल हैं, साथ ही लंबे समय के आर्थिक सुधार पर भी ध्यान देंगे।

इस पूरे घटनाक्रम ने खाड़ी नेतृत्व के बीच यह सोच मजबूत की है कि अमेरिका का समर्थन महत्वपूर्ण तो है, लेकिन अब अकेले उस पर निर्भर रहना पर्याप्त या सुरक्षित नहीं है, जिससे क्षेत्र एक अधिक आत्मनिर्भर और संतुलित सुरक्षा रणनीति की ओर बढ़ रहा है।
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BY Saba Parveen ·