क्यूबा के राष्ट्रपति मिगेल डियाज़-कैनेल ने संयुक्त राज्य अमेरिका के दबाव में इस्तीफा देने की मांग को खारिज कर दिया है। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि क्यूबा एक संप्रभु देश है और अपने राजनीतिक निर्णय खुद लेने में पूरी तरह स्वतंत्र है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाहरी शक्तियां, खासकर अमेरिका, क्यूबा की सरकार या नेतृत्व को बदलने का अधिकार नहीं रखतीं। उन्होंने यह भी कहा कि दबाव में आकर पद छोड़ना क्यूबा की क्रांतिकारी परंपरा का हिस्सा नहीं है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब क्यूबा और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ रहा है। अमेरिका ने उन देशों पर सख्ती की चेतावनी दी है जो क्यूबा को तेल की आपूर्ति करते हैं, जिससे पहले से चल रहे ऊर्जा संकट की स्थिति और गंभीर हो गई है।
इस साल की शुरुआत में वेनेजुएला से तेल की आपूर्ति में रुकावट आने के बाद क्यूबा की ईंधन व्यवस्था पर और दबाव बढ़ गया है। देश को अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
इन परिस्थितियों में रूस ने क्यूबा के प्रति अपना समर्थन दोहराया है और सहयोग बढ़ाने की बात कही है। हवाना की हालिया यात्रा के दौरान रूस के उप विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव ने कहा कि रूस क्यूबा के साथ खड़ा रहेगा और भविष्य में भी मदद जारी रखेगा।
रूस का यह समर्थन उस व्यापक भू-राजनीतिक स्थिति को दर्शाता है, जिसमें क्यूबा एक ओर अमेरिका के दबाव का सामना कर रहा है और दूसरी ओर अपनी आर्थिक और ऊर्जा चुनौतियों से निपटने के लिए रूस के साथ अपने संबंध मजबूत कर रहा है।