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यूपी: ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के मामले में हाईकोर्ट सख्त, पंचायत चुनाव की तिथि मांगी

यूपी: ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के मामले में हाईकोर्ट सख्त, पंचायत चुनाव की तिथि मांगी प्रयागराज, 3 जून; Allahabad High Court ने उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें प्रशासक नियुक्त किए जाने के मामले में राज्य सरकार से कड़ा रुख अपनाते हुए पंचायत चुनाव की समय-सीमा पर जवाब मांगा है। अदालत ने सरकार से स्पष्ट करने को कहा है कि पंचायत चुनाव कब तक कराए जाएंगे और इस संबंध में क्या तैयारी की गई है याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी कि निर्वाचित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद पूर्व ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में नियुक्त करना लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना के विपरीत है। उनका कहना है कि पंचायतों में जनप्रतिनिधियों के स्थान पर प्रशासनिक व्यवस्था लागू करना संविधान के 73वें संशोधन की मंशा के अनुरूप नहीं है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि पंचायत चुनाव कराने में देरी क्यों हो रही है और चुनाव कार्यक्रम घोषित करने की दिशा में क्या कदम उठाए गए हैं। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि स्थानीय निकायों में निर्वाचित प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति लंबे समय तक स्वीकार्य नहीं हो सकती।

 

राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि पंचायत चुनाव की तैयारियों और आरक्षण संबंधी प्रक्रिया पर कार्य किया जा रहा है। हालांकि अदालत ने चुनाव की संभावित तिथि और पूरी प्रक्रिया की समय-सीमा का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं मामले की अगली सुनवाई में सरकार को पंचायत चुनाव के संबंध में अपना पक्ष और प्रस्तावित कार्यक्रम अदालत के समक्ष रखना होगा। इस मामले पर प्रदेश भर की ग्राम पंचायतों और स्थानीय राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है, क्योंकि अदालत का फैसला पंचायत शासन व्यवस्था और आगामी चुनावों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

 

मुख्य बिंदु: हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव की तिथि पर सरकार से जवाब मांगा। ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के निर्णय को चुनौती दी गई है। अदालत ने चुनाव में देरी के कारणों पर सवाल उठाए। राज्य सरकार को चुनाव संबंधी तैयारी और समय-सीमा बताने के निर्देश। मामले की अगली सुनवाई में विस्तृत जवाब पेश किया जाएगा।