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यूपी से गौरैया विलुप्त होने की कगार पर, सीएम योगी ने जताई चिंता

 

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कभी घर-आंगन की पहचान मानी जाने वाली गौरैया अब तेजी से गायब होती जा रही है। इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने युवाओं से प्रकृति और जैव विविधता के संरक्षण के लिए आगे आने की अपील की है। हाल ही में जारी अपने संदेश में उन्होंने कहा कि गौरैया, जुगनू और मैना जैसे जीवों का कम होता दिखाई देना पर्यावरणीय असंतुलन का संकेत है और यह समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक विकास आवश्यक है, लेकिन इसके साथ प्रकृति का संतुलन बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवाओं से पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूकता फैलाने तथा पक्षियों और जीव-जंतुओं के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने का आह्वान किया। 

विशेषज्ञों के अनुसार, शहरीकरण, मोबाइल टावरों की बढ़ती संख्या, पुराने घरों की जगह आधुनिक इमारतों का निर्माण तथा कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग के कारण गौरैया की संख्या में लगातार गिरावट आई है। कभी हर घर की छत और आंगन में दिखने वाली यह छोटी चिड़िया अब कई इलाकों में दुर्लभ होती जा रही है। गौरैया की घटती आबादी पर्यावरणीय स्वास्थ्य के लिए भी चिंता का विषय मानी जाती है। 

हालांकि प्रदेश में कई सामाजिक संगठन और पर्यावरण प्रेमी गौरैया संरक्षण के लिए प्रयास कर रहे हैं। कहीं कृत्रिम घोंसले लगाए जा रहे हैं तो कहीं लोगों को दाना-पानी रखने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। बिजनौर की प्रसिद्ध “गौरैया वाली हवेली” इसका अनूठा उदाहरण है, जहां हजारों गौरैयों को सुरक्षित आश्रय मिला हुआ है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते संरक्षण के प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियां गौरैया को केवल तस्वीरों में ही देख पाएंगी। इसलिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को इस नन्हे पक्षी के संरक्षण में अपनी भूमिका निभानी होगी। 

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लखनऊ के ईको गार्डन में शिक्षा व्यवस्था की बदहाली के खिलाफ प्रदर्शन

  • प्रदर्शन में शामिल लोगों ने हाथों में तख्तियां लेकर "बेहतर शिक्षा हमारा अधिकार", "खाली पदों पर भर्ती करो" और "सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करो" जैसे नारे लगाए।
BY Himanshu Dubey ·
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खराब मौसम को लेकर विशेषज्ञों की चेतावनी, लोगों से सतर्क रहने की अपील

  • विशेषज्ञों का कहना है कि तेज बारिश और हवाओं के कारण सड़क यातायात प्रभावित होने की आशंका है। कई इलाकों में जलभराव, दृश्यता में कमी और पेड़ों की शाखाएं टूटने जैसी घटनाएं सामने आ सकती हैं।
BY Himanshu Dubey ·